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मलिकपुर गौशाला दो गायों की मौत, कई गंभीर बीमार, प्रधान-एनजीओं संचालक ने लगाए आरोप प्रत्यरोप

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उझानी,(बदायूं)। ब्लाक क्षेत्र के गांव मलिक की वृहद गौशाला में व्याप्त अवस्यवस्थाओं और गौवंशों को भरपेट चारा न मिलने के चलते दो गायों की मौत हो गई जबकि कई गाय गंभीर रूप से बीमार है और स्थिति यह है कि उन्हें समय पर इलाज न मिला तो वह भी मरणासन्न अवस्था में पहुंच सकती है। गायों की मौत पर ग्राम प्रधान और गौशाला के संचालक एनजीओं कर्मियों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए है। पूरे मामले से प्रशासनिक अधिकारी भी अंजान बने हुए हैं।

गांव मलिकपुर ग्राम पंचायत के पटपरागंज स्थित वृहद गौशाला में शनिवार को दो गायों के मरने और उनके गौशाला पड़े होने पर ग्रामीणों में रोष फैल गया और वह मौके पर आ पहुंचे। इस बीच गौशाला का संचालन कर रहे एनजीओ संचालक और प्रधान मनोज कुमार भी आ गए। ग्रामीणों की माने तब मरने वाली गायों की आंखों तक को पक्षी नोंच कर ले गए थे। ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने बताया कि गौशाला संचालन की जिम्मेदारी एक एनजीओ को सौंपी गई है मगर एनजीओ संचालक यहां से भूसा आदि दूसरे गांवों की गौशाला को भेज रहे है जबकि यहां मौजूद गायें भूखी रहती है। प्रधान का कहना है कि एनजीओ संचालक अभी तक चोकर तक  नही आया है।

प्रधाान के आरोपों को निराधार बताते हुए एनजीओ गौमाता सेवाजन समाज कल्याण के संचालक अरूण शर्मा और नवनीत ने बताया कि मलिकपुर की गौशाला प्रधान द्वारा पूरी तरह से उनकी संस्था के सुपर्द नही किया गया है और जो गाएं मरी है वह उनके लाई गई नही थी। संस्था के संचालक का कहना है कि उन्होंने चारे को मंगवाया है जो जल्द गौशाला में पहुंच जाएगा। संचालकों का कहना है कि यहां पूर्व में मरी गायों को भी गौशाला में दफन किया गया है। प्रधान और एनजीओ संचालक के आरोप प्रत्यारोपों के बीच यह कोई न बता सका कि गौशाला में जो गंभीर रूप से बीमार गायें है उनके इलाज के लिए क्या कदम उठाएं जा रहे है और गायों के लिए चारे और भूसा का इंतजाम कब तक हो जाएगा?

ग्रामीणों मंे दबी जुबान से चर्चा हो रही थी गौशाला में करीब 160 गायें है और इन गौवंशों को खाने में केवल सूखा भूसा ही दिया था जिससे गाय कमजोर होती चली गई जिससे दो गायों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में गायें गंभीर रूप से बीमार और घायल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर एनजीओ संस्था ने भी गायों के प्रति लाहपरवाही बरती तो और भी गायें मौत के मुंह में जा सकती है। कई ग्रामीणों ने कहा कि इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप करना चाहिए।

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