जनपद बदायूं

सामाजिक परिवर्तन हुआ ऐसा, पहले आज्ञाकारी पुत्र पैदा होते थे, अब सब आज्ञाकारी पति पैदा हो रहे है

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बिसौली(बदायूं)। संस्कार भारती के तत्वावधान में भारत माता पूजन उत्सव एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने ओजस्वी वाणी से सामाजिक कुरितियों पर तीखे प्रहार किये।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक आशुतोष मौर्या ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप जला कर एवं पूजा अर्चना करके कराया। इस अवसर पर उझानी के वरिष्ठ कवि डा. गीतम सिंह ने अपनी कविता यूं पढ़ी
सामाजिक परिवर्तन हुआ ऐसा, एकल ही परिवार सब हो रहे
पहले आज्ञाकारी पुत्र पैदा होते थे, अब सब आज्ञाकारी पति पैदा हो रहे है।
कवि ओजस्वी जौहरी सरल ने कहा- डर नही लगता मुझको तीर से तलवार से, डर रहा हूं आदमी के दोगले व्यवहार से।
कवि विष्णु आसावा बोले- शहनाई बज रही धरा पर बज रहे साज रे, नन्हे नन्हे कदम बढ़ा कर आया रितुराज रे।
कवि रमेश चन्द्र मिश्रा ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा- हे बसंत रितुराज तुम्हें करते प्रणाम, हे प्रकृति प्रिय प्राण तुम्हें करते प्रणाम।

शाहजहांपुर से आये कवि महेन्द्र पाल सिंह मधुप ने बेटियों को सर्वोपरि बताते हुए अपनी कविता यूं पढ़ी
चन्दा जैसी बेटिया कह मत देना मित्र, बेटी सूरज सी तपे देखो इनके चित्र
अलीगढ़ के कवि जीवन कश्यप अंशुल बोले- है किसी के पास कोठी कोई रखता मकां है, अमीर तो मै सबसे हूं, मेरे पास मेरी मां है
मैनपुरी के कवि सतीश समर्थ बोले- तन बसंती मन बसंती उर बसंती अब बना, मलय से लाने सुरभि हित पर बसंती अब बना
कवि प्रवीण अग्रवाल नदान ने कहा- सभी के पूर्ण हुए अभिमान, बिराजे है प्रभु अपने धाम।
कवि राजीव उपाध्याय बोले- क्यो इतना जलते रहे दहन हो गए राख, मन मलीन कर कर मरे इज्जत बची न साख।

इस अवसर पर संस्कार भारती के नगर अध्यक्ष डॉ रूपेंद्र आर्य, महामंत्री हरगोविंद पाठक एवं कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार भट्ट एवं कार्यक्रम के संयोजक हरगोविंद पाठक एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। अध्यक्षता श्रीपाल, संचालन विजय सक्सेना ने किया।

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