उझानी,(बदायूं)। नगर के प्रमुख मार्ग कछला रोड पर पीडब्लूडी की जमीन पर दुकानदारों ने अवैध कब्जा कर वर्षो पूर्व दुकानें खड़ी कर ली। वर्ष 2014 में विभागीय अधिकारियों ने अवैध कब्जा करने वाले दोनों ओर के 191 दुकानदारों को दोषी मान कर उपजिलाधिकारी के पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत एक पत्र भेज कर कार्रवाई करने और अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगाई लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी दुकानों के अवैध कब्जा हटना तो दूर प्रशासनिक स्तर पर पत्र के अनुपालन में दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई तक न हो सकी है जिससे नागरिक किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होने पर प्रशासन की बड़ी लाहपरवाही मान रहे हैं।
वर्तमान समय में यातायात सुचारू रूप से जारी रखने के लिए प्रदेश की योगी सरकार बुल्डोजर कार्रवाई करने में पीछे नही है रविवार को प्रदेश के सीतापुर जनपद में पीडब्लूडी की जमीन पर बनी दुकानों को जमींदोज किया गया लेकिन बदायूं का जिला प्रशासन है कि उझानी नगर में पीलीभीत-भरतपुर राजमार्ग के कछला रोड पर पीडब्लूडी की भूमि पर दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध कब्जा को हटाने के लिए न जाने किस का दबाब मान रहा है जिसके चलते इस मार्ग पर यातायात लगातार बाधित हो रहा है और जाम लगने से आम आदमी बेहाल नजर आता है।
पीलीभीत-भरतपुर राजमार्ग (मिलेट्री रोड) पर वर्षो पूर्व दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे यातायात के लिए खाली पड़ी पीडब्लूडी की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करते हुए दुकानों के भवन खड़े कर लिए। बताते है कि अतिक्रमण होने के बाद लोनिवि के अधिकारियों ने कई बार किए गए अवैध कब्जा हटवाने के लिए निशान भी लगवाएं लेकिन यह केवल निशान तक ही सीमित बने रहे और अवैध अतिक्रमण को हटवाने के लिए ठोस पहल न हो सकी। बताते है कि जैसे जैसे आबादी और वाहन बढ़े तब तब आम आदमी को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताते हैं कि वर्ष 2013-14 में जब पीलीभीत-भरतपुर मार्ग की सड़क का निर्माण कराया जा रहा था इसी दौरान भारतीय किसान यूनियन ने कछला रोड का अवैध अतिक्रमण हटवाने के लिए आंदोलन शुरू किया था जो लगभग साढ़े तीन महीने तक चला था। बताते हैं कि भाकियू के आंदोलन के दौरान अवैध कब्जाधारियों में हड़कम्प मच गया था और वह अपने राजनैतिक आकाओं की शरण में पहुंच गए जिससे भाकियू का आंदोलन अंजाम तक नही पहुंच पाया।
बताते हैं कि नागरिकों और भाकियू के आंदोलन के दबाब के बाद अवैध कब्जाधारियों को मिले राजनैतिक संरक्षण के बीच लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाल लिया और फिर क्या था कि अधीक्षण अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग ने आनन-फानन उपजिलाधिकारी सदर को 12 फरवरी 2014 को कछला रोड पर दोनों ओर पीडब्लूडी की भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले 191 दुकानदारों की सूची एक पत्र के साथ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत भेज कर विभागीय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटवाने और दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। लोनिवि के अधिकारी द्वारा इस पत्र को भेजे 11 साल का समय बीत चुका है जिस पर उपजिलाधिकारी सदर ने आज तक संज्ञान नही लिया और अब यह पत्र एसडीएम कार्यालय में किसी कोने में पड़ा धूल फांक रहा होगा।
यहां बताते चले कि घंटाघर चौराहें से लेकर कश्यप पुलिया तक यातायात का इतना बोझ है कि किसी समय पैदल निकलना तक दूभर हो जाता है। वर्ष 2013-14 में किसान आंदोलन के सहयोगी बने भाकियू चढ़नी के प्रदेश सचिव आसिम उमर ने बताया कि जब अतिक्रमण होता है तब स्थानीय प्रशासन से लेकर जिले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी मौनी साध कर रखते है और जब जनता को अतिक्रमण से परेशानी होने लगती है तब वह अतिक्रमण को गंभीरता से हटवाने के बजाय सिर्फ दिखावा करते हैं जिससे अतिक्रमण बरकरार बना रहता है। श्री उमर ने बताया कि उन्होंने अपने संगठन के माध्यम से गत 11 जुलाई को जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा था जिसमें उझानी के कछला रोड के अतिक्रमण का बिन्दु प्रमुखा था फिर भी जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान देने की जरूरत नही समझी थी। नागरिकों का कहना है कि जब तक कछला रोड का अवैध अतिक्रमण नही हटेगा तब तक इस मार्ग पर आवागमन इसी तरह से बाधित होता रहेगा। इस मामले में जब विभागीय अधिकारियों से फोन पर सर्म्पक साधने का प्रयास किया गया मगर उनके फोन नाट रिचीबिल आ रहे थे।




