उत्तर प्रदेशजनपद बदायूं

बदायूं के इतिहास में पहली बार किसी न्यायिक अधिकारी ने किया सुसाइड, अधिकारी और अधिवक्ता है स्तब्ध

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बदायूं। शनिवार को महिला न्यायिक अधिकारी ज्योत्सना राय के आत्महत्या करने से न्यायिक अधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारी और अधिवक्ता स्तब्ध रह गए है। किसी ने सपने में भी नही सोचा होगा कि पीसीएस जे की परीक्षा उर्त्तीण कर महिला न्यायिक अधिकारी ने अपना कैरियर के शुरूआत में ही इतना भयावह अंत कर दिया। किसी भी न्यायिक अधिकारी के सुसाइड करने की बदायूं के इतिहास में यह पहली घटना है।

मूल रूप से प्रदेश के जिला मऊ की निवासी कुमारी ज्योत्सना राय ने पीसीएस जे की परीक्षा उर्त्तीण कर अयोध्या से वर्ष 2019 में न्यायिक मजिस्टेªट के रूप में अपना कैरियर शुरू किया था। अयोध्या की प्रथम तैनाती के बाद वह दूसरी तैनाती पर बदायूं जनपद में 29 अप्रैल 2023 को आई और यहां सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात हुई। बदायूं में आए हुए उन्हें महज नौ माह ही हुए थे कि उन्होंनें 3 फरवरी को जज कालोनी स्थित अपने सरकारी आवास में अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। पीड़ितों को न्याय देने का संकल्प लेकर जज बनी कुमारी ज्योत्सना राय खुद के साथ अन्याय कर इस दुनिया से ही चली गई।

उनके सुसाइड की खबर जैसे ही न्यायिक, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ अधिवक्ताओं को लगी तब वह सब स्तब्ध रह गए। सहज ही किसी को विश्वास नही हो रहा था कि एक होनहार अधिकारी इतने कम समय मंे इस दुनिया से इस तरह से चलीं जाएंगी। महिला जज द्वारा आत्महत्या करने पर वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश शरण वर्मा और ब्रजपाल सिंह शाक्य ने कहा कि जीवन का अंत कर देना किसी समस्या का समाधान नही बल्कि बढ़ावा देना होता है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि होनी को तो नही टाला जा सकता लेकिन अगर वह किसी गंभीर समस्या से ग्रस्त थी तब ऐसी स्थिति में वह महिला जजों से अपने मन की बात कर समस्या का निस्तारण कराने का प्रयास कर सकती थी। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना हैं कि मन को कुछ कचोट रहा हो या फिर अन्य कोई भी गंभीर समस्या हो तो वह आपसी बातचीत के जरिए हल हो सकती है।

उन्होंने उनकी मौत पर दुख जता कर ईश्वर से आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। अधिवक्ता बाल कृष्ण वर्मा, विश्वनाथ मौर्य, पवन कुमार, सतेन्द्र पाल सिंह, लाल बहादुर, योगेश सक्सेना योगी, जोगेन्द्र शाक्य समेत अन्य अधिवक्ताओं ने महिला जज की मौत पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि महिला जज कुमारी ज्योत्सना का यह शुरूआती कैरियर था जो भविष्य में तरक्की करता हुआ काफी आगे तक जा सकता था लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। अधिवक्ताओं ने कहा कि आत्महत्या के पीछे के कारणों का शीध्र खुलासा होना चाहिए। बताते हैं कि दिवंगत महिला जज के पिता भी रिटायर्ड जज हैं।

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