जनपद बदायूं

आखिर क्यों नही सुन रहा है प्रशासन मुनेन्द्र के परिजनों की बात, क्यों कह रहा है कि आगजनी में नही हुई जनहानि

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उझानी,(बदायूं)। किसी भी वजह से हुई मालहानि की क्षतिपूर्ति की जा सकती है लेकिन अगर क्षति किसी इंसान की हुई हो तो क्या उसकी पूर्ति या उसे वापस लाया जा सकता है। ऐसा ही एक सवाल उझानी मैंथा फैक्ट्री में लगी आगजनी में जनहानि को लेकर उठ रहा है। मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बिचौला का रहने वाला मुनेन्द्र आगजनी के बाद से ही गायब है फिर भी फैक्ट्री मालिक और जिलाधिकारी समेत पुलिस प्रशासन किसी भी जनहानि न होने का दावा कर रहा है जबकि मुनेन्द्र के परिजन आग में जलने की बात कह रहे है। प्रशासन ने न सुनी तब वह उसे तलाशने फैक्ट्री पहुंच गए और अंदर जाने का प्रयास करने लगे तब पुलिस ने संवेदनाओं को दर किनार कर सभी को लठिया कर भगा दिया।

मुनेन्द्र पुत्र हेमराज उझानी की मैंथा फैक्ट्री में अपने भाईयों के साथ काम करता था। बताते हैं कि बुधवार को जब फैक्ट्री में आग लगी तब मुनेन्द्र के भाई किसी तरह फैक्ट्री से बाहर निकल आए लेकिन मुनेन्द्र नही निकल सका। भाई गजेन्द्र ने बताया कि उसने अपने भाई को बचाने का प्रयास किया लेकिन उसके पैर जल गए मगर वह अपने भाई को न निकाल सका। बताते हैं कि मुनेन्द्र के भाई पुलिस को बता रहे थे कि उनका भाई फैक्ट्री से नही निकल सका है लेकिन उनकी किसी ने न सुनी। चूंकि आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था जिससे अफरा तफरी का माहौल बन चुका था। आगजनी के दूसरे दिन गुरूवार को दमकल कर्मियों ने हद तक आग पर काबू पा लिया था तब फिर परिजनों ने मुनेन्द्र को तलाश कराने की बात मौजूद पुलिस और अधिकारियों से की मगर कोई भी उनकी सुनने को तैयार न था।

बताते हैं कि दोपहर में जिलाधिकारी अवनीश राय ने फैक्ट्री में राहत कार्य का निरीक्षण किया और इसी दौरान डीएम ने पत्रकारो से बात की और दावा किया कि कोई जनहानि नही हुई है जब पत्रकारो ने मुनेन्द्र के गायब होने की बात पूछी तब उन्होंने गोलमोल जबाब दे डाला। बताते हैं कि फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल के पिता ब्रजेन्द्र गोयल ने भी पत्रकारों से बात की और संभावित नुकसान तथा आग के कारणो को बताया। श्री गोयल ने दावा किया था कि आग ढांचा गिरने के आधा घंटा बाद लगी थी इस दौरान सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया था इस पर सवाल उठता है कि अगर केवल ढांचा ही गिरा था और आग आधा घंटा बाद लगी थी तो मौजूद सभी कर्मियों की पहचान क्यों नही की गई थी अगर पहचान हो जाती तो मुनेन्द्र का भी पता चल जाता। चर्चा यह भी हो रही है कि क्या मुनेन्द्र गिरे हुए ढांचा के नीचे गया था जिससे वह न निकल सका हो और आग की चपेट में आ गया हो?

घटना स्थल के आसपास हो रही चर्चाओ को माने तब ढांचा गिरने के साथ ही आग लग गई थी और तेज हवाओं के चलते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। घटना के वक्त काम कर रहे मुनेन्द्र के भाई गजेन्द्र की माने तब स्टेªचर गिरते ही आग लग गई और विकराल रूप धारण कर लिया। उसका कहना है कि फैक्ट्री मालिक की आग आधा घंटा बाद लगने की बात पूरी तरह से झूठी है। परिजनों का कहना हैं कि आग बुझने के बाद उन्होंने मुनेन्द्र को फंसे हुए स्थान के बारे में बता कर उसे तलाश करने की गुहार पुलिस से लगाई लेकिन पुलिस ने उनकी सुनने के बजाय हम पर लाठिया भांजी और मुनेन्द्र के ममेरे भाई की जमकर पिटाई लगाने के बाद कोतवाली में ले जाकर बैठाया। पुलिस से पीड़ित जितेन्द्र नामक युवक का कहना हैं कि उसे देर रात पुलिस ने थाने से छोड़ा है।

मुनेन्द्र के परिजनों का कहना हैं कि मुनेन्द्र के आग में जलने की तहरीर लेकर वह कोतवाली पहुंचे तब पुलिस ने तहरीर तो ले ली मगर उसकी कोई रसीद तक न दी। परिजनों ने बताया कि उन्होंने डीएम तक को भी प्रार्थना पत्र दिया है मगर उनकी किसी भी स्तर पर सुनवाई नही हो पा रही है। परिजनों ने बताया कि पुलिस और फैक्ट्री मालिकान आग में जले मुनेन्द्र के अवशेषो को गायब करने की साजिश रच रहे है यही वजह है कि वह घटना स्थल से उनकी मौजूदगी में मलबा नही हटाना चाह रही है। परिजनों का आरोप है कि जब वह मलबा हटाने वाली जेसीबी के पास जाते है तभी पुलिस काम को रोक देती है। परिजनों ने बताया कि अगर उनकी न सुनी गई तब वह इसकी शिकायत सीएम योगी से करेंगे और सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पीछे नही हटेंगे।

मुनेन्द्र के जीवित होने की आशंका कम, दो मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
उझानी। मैंथा फैक्टरी में काम करते वक्त आग में फंसे मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बिचौला टप्पा जामनी निवासी मुनेन्द्र के अब जीवित होने की आस लगभग समाप्त हो गई है। उसके न रहने से उसकी दो मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया हैे। छोटी बेटी अपने पिता को याद कर रोने लगती है। मुनेन्द्र की शादी लगभग छह साल पूर्व रेखा के साथ हुई थी और उसके दो बेटिया है जो अब पिता के प्यार को हमेशा के लिए तरसेगी।

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