बच्चें ने खेलते वक्त अचानक पकड़ा था मंदिर का जाल
उझानी,(बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के गांव बसौमा में मंदिर के जाल में आ रहे करंट ने घर के बाहर खेलते वक्त एक ग्रामीण के इकलौते चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया। बच्चें की मौत पर माता पिता व अन्य परिजनों का रो रोकर बुरा हाल बना हुआ है वही पूरा गांव शोकाकुल हो गया है।

गांव निवासी गौरव सोलंकी का 11 वर्षीय पुत्र अंशुमन उर्फ आशू मंगलवार की शाम अपने घर के बाहर गली में बने मंदिर के समीप गांव के अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। बताते हैं कि खेल के दौरान अंशुमन का हाथ अचानक मंदिर की दीवार पर लगे लोहे के जाल से जा लगा। बताते हैं कि लोहे के जाल में तेज करंट प्रवाहित हो रहा था जिससे अंशुमन करंट की चपेट में आकर वही चिपक गया। बताते हैं कि हादसा होते देख बच्चों में हड़कम्प मच गया और उन्होंने शोर मचा कर ग्रामीणों और बच्चे के परिजनो को बुला लिया।
बताते हैं कि ग्रामीणों ने किसी तरह से उसे करंट की चपेट से छुड़ाया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बताते हैं कि परिजन और ग्रामीण उसे जीवित समझ कर उझानी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर पर माता पिता और अन्य परिजनो में चीत्कार मच गयी। मृतक बच्चे की मां का रो रोकर बुरा हाल हो गया है। करंट से बच्चें की मौत पर पूरे गांव में मातम पसर गया है।
एक माह से आ रहा था करंट, कल ही बदली केबिल फिर भी हो गया हादसा
मृतक बच्चे अंशुमन के पिता गौरव की माने तब गत एक माह से मंदिर के जाल में करंट आ रहा था और कई ग्रामीण करंट की चपेट मंे आ चुके थे। बताते हैं कि कई बार शिकायत के बाद भी मंदिर की केबिल नही बदली गई थी। पिता गौरव का कहना है कि गांव प्रधान के कहने पर एक दिन पूर्व केबिल बदल कर दूसरी डाली गई थी फिर भी जाल का करंट बंद न हुआ और इसकी कीमत उसके मासूम बच्चे को जान देकर चुकानी पड़ी।
घर का इकलौता चिराग था अंशुमन
मृतक अंशुमन अपने माता पिता का इकलौता वारिस था। उसके माता पिता उसे नाजो से पाल रहे थे लेकिन विधि के विधान को कुछ और ही मंजूर था जिसके चलते करंट रूपी मौत अंशुमन को हमेशा के लिए माता पिता से छीन कर अपने साथ ले गई। इकलौते बेटे की मौत का दर्द शायद ही माता पिता जीवन पर्यंत भुला पाएंगे।





