उझानी,(बदायूं)। दिवंगत साहित्यकार टिल्लन वर्मा के जन्मोत्सव पर नगर के कवियों ने जीएस हास्पीटल में आयोजित काव्य सम्मेलन के जरिए भावभीनी श्रद्धांजलि दी और साहित्यकार के परिजनों के साथ केक काट कर उनका जन्मोत्सव मनाया।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कवि विवेक चतुर्वेदी बोले-
दशरथ की इच्छा राम को वनवास देती है। संभालने का अवसर भी किसी की प्यास देती है।।
दोबारा से खड़े होने का मन यूं ही नहीं बनता-यह टूटी हुई हिम्मत भी हमें आस देती है। वरिष्ठ कवि शैलेंद्र घायल ने अपनी कविता बेटियों के लिए समर्पित करते हुए कहा कि-
बेटी को मत मारिए यह आंगन का दीप।
बेटी से संसार है ज्यों सागर में शीप।
कवि वारिस बदायूनी बोले- सॉन्ग में बस्ती डूब जाती है। जब भी टिल्लन की याद आती है।। वरिष्ठ कवि डॉ गीतम सिंह ने अपनी कविता कुछ यूं पढ़ी- आशिकी को छोड़कर हम सादगी करने लगे। आम चर्चा आदमी भी अब सभी करने लगे।। कवि अनिल वार्ष्णेय ने अपनी कविता में कहा कि –
हर पेज पर चाहिए पेश कार को घूस।
मुंसिफ बैठा देखता पेशकार है खड़ूस।।
गोष्ठी की अध्यक्षता ओमप्रकाश वर्मा पप्पी ने की जबकि संचालन कवि विवेक चतुर्वेदी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में दिवंगत कवि की पत्नी आरती वर्मा शामिल रही। गोष्ठी में अनिल कुमार गुप्ता उर्फ टिन्नु, डॉ. विकास प्रजापति, आकाश, हंसराज, रामपाल एड, डॉ. प्रभाकर मिश्रा , संजीव अमर, श्रीमती रीता शर्मा श्रीमती अरूणा कुमारी, वीरपाल आदि उपस्थित रहे।




