उझानी

परिजनों ने प्रशासन पर उठाएं सवालः सीज फैक्ट्री में कैसे हो रहा था काम, बैंक ने भी कर रखी थी अटैच

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उझानी,(बदायूं)। गत वर्ष मई में गंदे पानी और फिर भीषण आग से चर्चा में आई समीपवर्ती गांव कुड़ानरसिंहपुर की बंद पड़ी मैंथा आयल फैक्ट्री एक बार फिर तीन सुरक्षा गार्डो की मौत से विवादों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को फैक्ट्री परिसर में एक साथ तीन मजदूरों की मौत पर वहां पहुंचे परिजनों ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब आगजनी के बाद फैक्ट्री को सीज कर दिया गया था तो फिर वहां किसके आदेश पर काम हो रहा था और इसके लिए प्रशासन अंजान क्यों बना रहा जिसके चलते तीन युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। परिजनों का कहना है कि बैंक ने भी फैक्ट्री को अटैच कर लिया है इसके बाद भी वहां कारोबार होना बड़ी प्रशासनिक चूक है। बदायूं सांसद आदित्य यादव ने भी प्रशासन और भाजपा सरकार पर सवाल खड़े करते हुए मृतकों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

उझानी निवासी मनोज गोयल पुत्र ब्रजेन्द्र गोयल की यह फैक्ट्री गत वर्ष विवादों में पहली बार जब आई जब ग्रामीणों ने फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल पर गंदा और कैमिकल युक्त पानी से गांव का भूजल दूषित होने का आरोप लगाते हुए भाकियू के साथ प्रदर्शन किया। इसके बाद 21 मई को आई भंयकर आंधी और बरसात के बीच फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग इतनी खतरनाक थी कि पूरा गांव तो खाली हुआ ही साथ ही उझानी नगर के वाशिंदे भी नगर छोड़ भागने लगे। बताते हैं कि इस दौरान जागरूक नागरिकों ने किसी तरह से स्थिति को संभाला। इस आगजनी में एक मजदूर की मौत भी हो गई थी। प्रशासन ने इस पूरे मामले में लीपापोती की और मजदूर की मौत से जुड़े राज दफन कर दिए। बताते हैं कि आगजनी में फैक्ट्री मालिकानों ने 100 करोड़ के नुकसान का दावा किया लेकिन इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर मैंथा फैक्ट्री को सीज कर दिया गया। बताते हैं कि आगजनी के बाद बरेली के बैंक आफ बडौदा ने फैक्ट्री को अपने लोन के चलते अटैच भी कर लिया था और एक गार्ड को भी सम्पत्ति की रक्षा के लिए तैनात कर दिया।

मंगलवार 13 जनवरी को जब फैक्ट्री में रात्रिकालीन तैनात तीन सुरक्षा गार्डो जोगेन्द्र यादव, विवेक यादव और भानु यादव के शव मिले तो हड़कम्प मच गया और जब परिजनों ने मालिकानों पर हत्या के आरोप लगाए साथ ही प्रशासन पर सीज फैक्ट्री में कारोबार होने पर सवाल उठाएं तब मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जबाब देते नही बन पा रहा था। ग्रामीणों ने मैंथा के ड्रमों पर 12 जनवरी के रेपर भी दिखाएं और कहा कि राजनैतिक संरक्षण तथा प्रशासनिक स्तर पर मिल रहे संरक्षण के चलते ही फैक्ट्री के तीन सुरक्षा कर्मियों की एक साथ मौत हुई है। मृतकों के परिजनों का कहना है कि फैक्ट्री में हो रहे गोरखधंधे के कारण ही तीनों की सुनियोजित तरीके से हत्या कर लाश को गार्ड रूम में इसलिए रखवा दिया ताकि यह महज एक हादसा लगे। हांलाकि यह पुलिस की जांच का विषय है लेकिन सीओ उझानी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि वह इसकी भी जांच कराएंगे कि सीज फैक्ट्री में काम कैसे हो रहा था।

यहां बताते चले कि उक्त बंद फैक्ट्री को कर्ज के चलते बैंक ने अटैच कर लिया था इसके बाद भी फैक्ट्री परिसर में बिना अनुमति कारोबारी गतिविधियां संचालित रही। तीन सुरक्षा गार्डो की एक साथ मौत पर बदायूं सांसद आदित्य यादव ने बंद फैक्ट्री में काम कैसे कराया जा रहा था यह प्रशासनिक मिलीभगत और भाजपा सरकार की ढीली निगरानी का का परिणाम है। उन्होंने भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर दम भरने वाली भाजपा सरकार बताएं कि अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री पर कार्रवाई क्यों नही हुई और मजदूरों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने शासन से मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार फैक्ट्री मालिकों और लाहपरवाह प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।

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