उझानी

वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा मुक्त कराने पहुंचे वन अधिकारियों की किसान से हुई झड़प, मारपीट, पुलिस को नही मिली तहरीर

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उझानी,(बदायूं)। कासगंज छोर की ओर गंगा पार चंदनपुर की कटरी में वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा करने और उस पर खेती आदि करने की सूचना पर बीती रात मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों और किसानों के बीच झड़प और मारपीट हो गई। इस दौरान दोनों ओर से घायल होने की चर्चा भी है मगर कोई भी पक्ष पुलिस के पास नही पहुंचा है और न ही तहरीर दी है। अवैध कब्जा करने वाले किसान कासगंज जनपद के बताए जा रहे हैं।

बताते हैं कि बदायूं जिले के गांव चंदनपुर की कटरी में कासगंज छोर की ओर गंगा पार वन विभाग की बड़ी मात्रा में जमीन है। बताते हैं कि कटरी की इस जमीन पर कासगंज जिले के गांवों के किसानों ने अवैध कब्जा कर लिया है और खेतीबाड़ी करते हैं। बताते हैं कि अवैध कब्जा की एक सूचना पर बदायूं वन विभाग के सीओ स्तर के अलावा दरोगा, सिपाही और अन्य वन कर्मी सोमवार की देर रात मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की जमीन पर बोई गई फसल को वाहनों से रौंदने लगे जिस पर मौके पर मौजूद किसानों ने वन विभाग की टीम का विरोध करना शुरू कर दिया जिससे वन विभाग ने किसानों को दौड़ा दिया इसके बाद दोनों पक्षों में जोरदार झड़प और मारपीट तक हो गई। बताते हैं कि मामला बढ़ता देख वन विभाग के अधिकारी और टीम मौके से भाग निकली। चर्चा यह भी है कि वन विभाग के सीओ की गाड़ी में भी तोड़फोड़ हुई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वन विभाग के अधिकारियों ने उझानी पुलिस तक को मौके पर जाने और विवाद की सूचना तक नही दी है जबकि बताते हैं कि सोमवार की देर रात हुई इस झड़प वन विभाग के कर्मी और किसान दोनों घायल हुए है। इस मामले को लेकर जब उझानी इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार से बात की गई तब उन्होंने पूरी जानकारी होने से इंकार कर दिया और सिर्फ इतना बताया कि मंगलवार की सुबह वन विभाग की ओर से उझानी पुलिस को केवल यह सूचना प्राप्त हुई है कि सोमवार की देर रात जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने गई ावन विभाग की टीम का किसानों से विवाद हो गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर न तो वन विभाग और न ही किसानों की ओर से तहरीर मिली है। जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने के लिए बगैर पुलिस को बताएं मौके पर पहुंचने पर वन विभाग के कर्मियों की कार्यशैली को लेकर तमाम चर्चाएं व्याप्त है। इस मामले में वन विभाग के डीएफओ से फोन पर सर्म्पक करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने रिंग जाने के बाबजूद मोबाइल फोन रिसीव करने की जरूरत नही समझी जिससे प्रतीत होता है कि वह घटना की वास्तविक जानकारी देने से कतरा रहे हैं।

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