बदायूं। जिले के उपनगर उझानी से सकरी जंगल होते हुए असरासी तक 16 से अधिक गांवों को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। इस संपर्क मार्ग पर सैकड़ो ग्रामीण निजी अथवा अन्य वाहनों से जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं लेकिन नेताओं और अधिकारियों का जमीर पूरी तरी के से मर चुका है यही कारण है कि एक दशक बीत जाने के बाद भी उझानी-सकरीजंगल- असरासी संपर्क मार्ग का पुन: निर्माण तक ना हो सका है।

संपर्क मार्गों के जरिए ग्रामीण इलाकों का विकास और किस की उपज को आसानी से मंडी स्थल तक पहुंचाने का दम भरने वाली भाजपा की योगी सरकार के अधिकारियों को उझानी सकरी जंगल और असरासी संपर्क मार्ग की बदहाली नजर नहीं आ रही है कि उक्त मार्ग की सड़क पूरी तरीके से खत्म होकर गढ़ों में परिवर्तित हो चुकी है। उक्त संपर्क मार्ग असरासी, अखटामई, मल्लामई, सकरी जंगल, बेनीनगला अहिरवारा तेहरा समेत 16 से अधिक गांवों को उझानी नगर से जोड़ता है और इन गांव की किसान तथा ग्रामीण में सैकड़ो की संख्या में रोजाना अपने निजी एवं कृषि कार्य के लिए आवागमन करते है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस संपर्क मार्ग की सड़क तो खत्म हो चुकी है केवल गड्ढे ही गड्ढे रह गए हैं जिसमें होकर वह लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आते जाते हैं और कभी-कभी इन गड्ढों में गिरकर चुटैल तक हो जाते हैं। इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों और महिलाओं ने बताया कि जिन पर निजी वाहन नहीं है वह इस मार्ग पर चल रहे किराए के वाहनों से हिचकोले खाते हुए आवागमन करते हैं। उन्हें इस दौरान डर लगा रहता है कि कहीं वाहन पलट ना जाए और वह हादसे का शिकार न बन जाए गड्ढें भरे इस संपर्क मार्ग पर देखा गया है कि अक्सर वहां इसमें फंसकर खराब हो जाते हैं जिस पर ग्रामीणों को पैदल चलना पड़ता है लेकिन गड्ढे होने के कारण पदयात्रा भी दुश्वार हो जाती है।
सकरी जंगल के प्रधान रिजवान अहमद अहिरवार गांव के प्रधान उदयवीर समिति बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बताया कि इस संपर्क मार्ग की देखभाल और निर्माण की जिम्मेदारी उझानी मंडी समिति प्रशासन की है लेकिन मंडी प्रशासन ने एक दशक से जर्जर और सड़क खत्म होते देख इसके पुन: निर्माण की जरूरत नहीं समझी है जिसके परिणाम में उक्त मार्ग गड्ढों वाला मार्ग बन चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि सपा सरकार से लेकर भाजपा सरकार के दूसरे कार्यकाल तक उन्होंने प्रत्येक सांसद और विधायक समेत शासन तक सड़क निर्माण की गुहार लगाई मगर किसी ने नहीं सुना। ग्रामीणों का कहना है कि जब चुने हुए प्रतिनिधि ही नहीं सुनते हैं तो प्रशासन तो अपनी मर्जी का मालिक है वह तो ग्रामीण कोई इस समस्या को दूर करने की बजाए मूकदर्शक बना हुआ है।
ग्रामीण बोले मंडी समिति से सड़क निर्माण का टेण्डर हो चुका है फिर भी नही बन रही है सड़क । कुछ जागरूक किसानों ने अपने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि मंडी समिति प्रशासन से इस संपर्क मार्ग की सड़क का निर्माण करने के लिए टेंडर हो चुका है उन्होंने बताया कि ठेकेदार इस मार्ग का निरीक्षण भी किया और यह कहते हुए सड़क का निर्माण नहीं कराया कि इसमें जरूर से ज्यादा माल लगेगा जिसके चलते इस मार्ग का पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा है यही वजह है कि ग्रामीण गड्ढों में चलने पर मजबूर हैं इस मामले में मंडी सचिव से बात करने की कोशिश की गई मगर वह मंडी समिति उझानी में मौजूद नहीं थे और जब उन्हें फोन किया तब सचिव ने फोन रिसीव करने की जरूरत नहीं समझी
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