बरेली

रेलवे ने स्टेशन परिसरों में पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक का उपयोग न करने को चलाया जागरुकता अभियान

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बरेली। रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार तथा मंडल रेल प्रबंधक इज्जतनगर सुश्री वीणा सिन्हा के मार्गदर्शन में विश्व पर्यावरण दिवस अभियान के अंतर्गत आज दसवें दिन इज्जतनगर मंडल पर प्लास्टिक न्यूनीकरण एवं सतत् पर्यावरणीय प्रथाओं को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के दौरान लालकुआं, काठगोदाम, रुद्रपुर सिटी, बरेली सिटी, कासगंज, काशीपुर, हल्द्वानी, फर्रुखाबाद एवं पीलीभीत स्टेशनों सहित मंडल के विभिन्न रेलवे परिसरों में पर्यावरण संरक्षण एवं प्लास्टिक उपयोग में कमी लाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता एवं निरीक्षण गतिविधियां संचालित की गईं। कार्यक्रमों में रेलवे कर्मचारियों, हाउसकीपिंग स्टाफ, कैटरिंग विक्रेताओं एवं यात्रियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

रेलवे कॉलोनियों, कार्यालयों, डिपो एवं विभिन्न स्टेशनों पर गौरैया एवं अन्य पक्षियों हेतु उपयुक्त स्थानों पर मिट्टी के जलपात्र/घड़ों की व्यवस्था की गई। इस पहल का उद्देश्य पक्षियों को गर्मी के मौसम में पेयजल उपलब्ध कराना तथा जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। निष्प्रयोज्य लिनेन से निर्मित पुनः उपयोग योग्य कपड़े के थैलों के प्रचार-प्रसार एवं वितरण संबंधी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। यात्रियों, कर्मचारियों एवं विक्रेताओं को प्लास्टिक कैरी बैग के स्थान पर इन कपड़े के थैलों के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया। विभिन्न स्टेशनों पर स्थापित प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों का निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली, स्वच्छता एवं रखरखाव की समीक्षा की गई। संबंधित कर्मचारियों को मशीनों के नियमित संचालन एवं प्लास्टिक अपशिष्ट के उचित निस्तारण के निर्देश दिए गए। स्टेशनों पर स्थापित जल पुनर्भरण केंद्रों का भी निरीक्षण किया गया तथा यात्रियों को पुनः उपयोग योग्य बोतलों के प्रयोग एवं जल पुनर्भरण हेतु प्रोत्साहित किया गया, जिससे एकल उपयोग प्लास्टिक बोतलों के उपयोग में कमी लाई जा सके।

अभियान के दौरान स्टेशन परिसरों में स्थित विक्रेता स्टॉल, कैटरिंग इकाइयों एवं रिफ्रेशमेंट रूमों का विशेष निरीक्षण कर एकल उपयोग प्लास्टिक सामग्री के प्रयोग पर प्रतिबंध के अनुपालन की जांच की गई। विक्रेताओं एवं कर्मचारियों को प्लास्टिक अपशिष्ट के दुष्प्रभावों, उचित निस्तारण एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के संबंध में जागरूक किया गया। साथ ही दूध एवं डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग थैलियों की आंशिक कटिंग के संबंध में भी कर्मचारियों एवं विक्रेताओं को संवेदनशील बनाया गया, जिससे माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सके।

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