बरेली। पूर्वाेत्तर रेलवे, इज्जतनगर मंडल पर मनाएं जा रहें ‘राजभाषा सप्ताह के समापन पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने अपनी मधुर वाणी से सबके मन को खुश कर दिया। समापन समारोह का शुभारंभ मंडल रेल प्रबंधक सुश्री वीणा सिन्हा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी डा. उरबान सितांशु आदि ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ बरेली के गीत एवं गजल के विख्यात कवि श्री कमल सक्सेना द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ ।
प्रख्यात कवि आनंद गौतम ने अपनी रचना कुछ इन शब्दों में सुनाकर श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं –
उलझे हुए प्रश्नों का समाधान करें हम।
आओ कि अपने देश का उत्थान करें हम।।
वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना ने श्रृंगार रस के अपने गीतों से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, उन्होंने अपनी बात कुछ इस तरह कही-
स्वदेशी रंग में रंगकर तेरी बेटी जवान होगी।
तुझे इस देश का चोला-चलन तब याद आएगा।।
वरिष्ठ कवि राजेश गौड़ ने पुरानी यादों ताजा करते हुए अपनी पँक्तियों को सुनाया-
मैंने कभी अपने आँसुओं का हिसाब नहीं रखा, बरसों पुराने मेरी डायरी के पन्ने आज भी गीले हैं।
कवि सचिन शर्मा ने बेटियों का जिक्र करते हुए अपनी कविता सुनाई –
मानो ब्रह्म लोक से कोई, सुखद संदेशा आया है,
धन्य-धन्य है घर द्वार, जहाँ बेटी ने जीवन पाया है।
मंच का संचालन करते हुए डा. मुकेश ’मीत’ ने हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए पंक्तियों गा कर सुनाई – जन जन की भाषा हिन्दी है, अपनी भाषा हिन्दी है।
पूर्व राजभाषा अधिकारी प्रभाकर मिश्र ने देश के सामाजिक परिवेश पर तीखा प्रहार करते हुए खूब वाहवाही लूटी कि –
रिश्तों को ’यूज’ करके व्यापार की तरह।
भूल गए कल के अखबार की तरह।
रेलवे के ही सेवानिवृत्त हास्य कवि पी.के. दीवाना ने अपनी पंक्तियां से सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया-
हास्य-व्यंग्य का कवि हूं लोगों को हंसाता हूं पर खुद नहीं हंस पाता हूं, क्योंकि -एक बार मुसीबत में फंस गया था, गलती से पत्नी पर हँस गया था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मंडल रेल प्रबंधक सुश्री वीणा सिन्हा ने कहा कि ’राजभाषा सप्ताह समारोह’ के दौरान मण्डल पर साहित्यिक आयोजन एवं प्रतियोगिताएं भी आयोजित गईं हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी डा. उरबान सितांशु नाग ने आभार व्यक्त किया।
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मानो ब्रह्म लोक से कोई, सुखद संदेशा आया है, धन्य-धन्य है घर द्वार, जहाँ बेटी ने जीवन पाया है।
Up Namaste staffSeptember 18, 2026
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