उझानी

एक्सिस बैंक के खाताधारक किसानों की कर्मियों ने बगैर अनुमति के कराई बीमा पॉलसी, किसानों के उड़े होश

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बदायूं। जिले के उपनगर उझानी स्थित एक्सिस बैंक कर्मियों ने एक बड़ा कारनामा करते हुए अपने खाता धारक किसानों के खाते से बिना अनुमति पैसा निकाल कर लाखों रुपया की एलआईसी और बजाज फाइनेंस की बीमा पॉलिसी करा दी। जब किसानों के पास बीमा पॉलिसी की लाखों रुपया की किस्त जमा करने का संदेश मिला तो उनके होश उड़ गए और वह भागे-भागे बैंक पहुंचे और मैनेजर समेत अन्य कर्मियों से शिकायत की तब बैंक कर्मियों ने किसानों की समस्या का निस्तारण कराने के बजाय उन्हें धमकाना शुरू कर दिया और पुलिस को बुला लिया। खाता धारक अपने रुपया वापस पाने के लिए बैंक अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।

सोमवार की दोपहर लिंक रोड स्थित एक्सिस बैंक के बाहर उझानी नगर के समीपवर्ती गांव अढ़ौली निवासी सर्वेश शर्मा, पुत्र रामकिशोर, धर्मेन्द्र, देशराज, हरप्यारी, खुशीराम, बबलू, दिनेश शकुन्तला देवी पत्नी नरेश समेत अन्य ग्रामीण परेशानी हाल में खड़े थे। जब इन ग्रामीणों से जानकारी की ली गई तब उन्होंने बताया कि वह सभी बैंक के खातेदार है और उनके खाते में हाइवे निर्माण के दौरान अधिग्रहित की गई जमीन का सरकार से मिला रुपया जमा था। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ रुपया की उन्होंने एफडीआर करा ली थी जबकि तीन से सात लाख रुपया उनके खाते में मौजूद थे।

खाताधारक किसानों ने बताया कि करीब दो साल पहले बैंक कर्मियों ने उनके साथ धोखाधड़ी करते हुए उनकी बिना अनुमति एवं हस्ताक्षर के भारतीय जीवन बीमा निगम और बजाज फाइनेंस में एक लाख रुपया से लेकर पांच लाख रुपया तक की बीमा पॉलिसी करा दी। किसानों का कहना है कि एक तो उनकी जमीन हाइवे निर्माण में चली गई वही दूसरी और भविष्य के लिए बैंक में जमा रुपया का बैंक कर्मियों ने बंदरबांट कर दिया जिससे उनका भविष्य अंधकारमय दिखने लगा है।

एक लाख रुपया की किस्त जमा करने का मैसिज मिला तब किसानों को पता चला
बीमा कम्पनियों से जब खातेधारक किसानों के पास सालाना किस्त के रूप में एक लाख रुपया या उससे अधिक रुपया जमा कराने के मैसिज आए तब किसानों को हुए धोखे का पता चला और वह बैंक पहुंचे लेकिन बैंक कर्मी और मैनेजर उनकी सुनने को तैयार नही थे। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंक कर्मी धमका रहे थे कि अगर जोर से बोले तो मुकदमा करा कर जेल भिजवा देंगे। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार को बैंक कर्मियों ने पुलिस को भी बुला लिया लेकिन वह अपनी जगह सही थे इसलिए पुलिस ने उनसे कुछ नही कहा।

मैनेजर अंचित बोला- किसानों ने खुद कराई है पॉलिसी, अनुमति के सवाल पर साधी चुप्पी
एक्सिस बैंक के मैनेजर अंचित शुक्ला से जब किसानों के साथ बैंक द्वारा की गई धोखाधड़ी और बिना अनुमति पॉलिसी कराने की जानकारी ली गई तो वह बोला कि किसानों ने खुद कराई है बीमा पॉलिसी। उसने बताया कि बीमा पॉलिसी में किसानों के फोटो और आधार एवं पेन कार्ड लगे हुए है। जब मैनेजर से पूछा गया कि खाताधारक किसानों के कागजात तो बैंक के पास रहते है ऐसी स्थिति में बैंक कर्मियों को कुछ भी करना बहुत ही आसान सा काम है। इस पर मैनेजर बोला कि हम कागजात मुख्यालय को प्रेषित करते है जिनका प्रिंट निकलना नामुमकिन है लेकिन जब मैनेजर अंचित से पूछा गया कि कागजात तो कम्प्यूटर से स्कैन करके मुख्यालय को भेजे होंगे जबकि मूल या फोटो प्रति तो बैंक में ही रहती होगी इस सवाल पर मैनेजर चुप्पी साध गया।

बीमा पॉलिसी में मोटी कमीशन के फेर में बैंक कर्मियों ने खातेधारकों के रुपयों का किया उपयोग
खातेधारक किसानों ने संभवना व्यक्त करते हुए कहा है कि बैंक कर्मियों ने उनके खाते में मौजूद रुपया एवं एफडीआर का उपयोग उनकी बगैर अनुमति के अपने निजी स्वार्थ या फिर मिलने वाली मोटी कमीशन के फेर में उनके भविष्य की बलि चढ़ा दी। पीड़ित किसानों का कहना है कि बैंक कर्मियों ने साथ धोखाधड़ी की है तो इसकी सजा भी बैंक कर्मियों को मिलनी चाहिए और अगर उन्हें कोई आर्थिक नुकसान होता है तो उसकी भरपाई भी बैंक और उसके कर्मियों से होनी चाहिए। किसानों का कहना है कि अब त्यौहारों का दौर है ऐसी स्थिति में उनके परिवार में खर्च के लिए नकदी की जरूरत थी जिसे बैंक कर्मियों ने अपने स्वार्थ के लिए समाप्त कर दी। अब वह कहा से पैसा लाकर अपना और परिवार का खर्च उठाएंगे।

एलआइसी कर्मी बोले- दो साल पहले बैंक ने कराई थी बीमा पॉलिसी
जब इस प्रकरण बीमा प्रक्रिया और पॉलिसी के बारे में स्थानीय एलआइसी शाखा में जानकारी ली गई तब पता चला कि एक्सिस बैंक की ओर से किसानों की बीमा पॉलिसी की गई थी। एलआइसी कर्मियों ने बताया कि इन बीमा पॉलिसी की सालाना किस्त करीब एक लाख रुपया है जो शायद ही गरीब किसान सालाना किस्त भर सके। एलआइसी कर्मियों ने बताया कि अगर कोई पॉलिसी बंद कराता है तो उसे 40 से 50 प्रतिशत ही रकम वापस मिल सकती है।

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