उझानीजनपद बदायूं

तो क्या हरविलास इंटरनेशलन स्कूल में फर्जी तरीके से संचालित हो रही हैं कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं?

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मान्यता का आवेदन हो चुका है निरस्त

उझानी(बदायूं)। नगर में संचालित हरविलास गोयल इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा छह से लेकर आठ तक की कक्षाओं को क्या फर्जी तरीके से संचालित किया जा रहा है? इस फर्जीवाड़े का खुलासा सहायक बेसिक निदेशक के पत्र से हुआ है जिसमें स्पष्ट हैं कि हरविलास गोयल इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा छह से आठ तक की मान्यता आवेदन को पूर्व में जमीनी विवाद के चलते निरस्त किया जा चुका है। इसके अलावा प्राईमरी की मान्यता पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मान्यता निरस्त होने के बाद भी कक्षा आठ तक की पढ़ाई स्कूल में चल रही है जो बेसिक शिक्षा विभाग की घोर लाहपरवाही को दर्शाती है।

बेसिक शिक्षा निदेशक तृतीय मंडल ने एक शिकायती पत्र का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया है कि उझानी में संचालित हरविलास गोयल इंटरनेशनल स्कूल का जमीनी विवाद है जिसके चलते प्रबंधतंत्र द्वारा स्कूल में कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं संचालित करने के लिए मान्यता का आवेदन किया गया था लेकिन विभाग ने स्कूल को मान्यता प्रदान नही की और आवेदन को ही निरस्त कर दिया था। यहां बताते चले कि विद्यालय लगभग एक वर्ष से संचालित हो रहा है और स्कूल में कक्षा एक से आठ तक की कक्षाएं संचालित हो रही है। यहां सवाल उठता है कि अगर विभागीय स्तर पर हरविलास गोयल इंटरनेशनल स्कूल को कक्षा छह से आठ तक की मान्यता प्रदान नही की गई तो अब तक उक्त कक्षाएं किस आधार पर संचालित हो रही थी? इस मामले का क्या कभी बेसिक शिक्षा विभाग ने संज्ञान ही नही लिया था? शिक्षाधिकारी ने इस मसले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी को बिन्दुबार जांच करने के निर्देश दिए है।

इसके अलावा सहायक शिक्षा निदेशक के पत्र में कक्षा एक से लेकर पांच तक की कक्षाओं के संदर्भ में स्पष्ट है कि इस स्कूल को कक्षा एक से पांच तक की मान्यता जमीनी विवाद के चलते कभी स्थाई नही दी गई थी। इन कक्षाओं का संचालित करने के लिए केवल एक वर्ष की अस्थाई मान्यता ही प्रदान की गई है। सहायक शिक्षा निदेशक ने बेसिक शिक्षाधिकारी को समक्ष अधिकारी बताते हुए आरटीआई 2009 की धारा 18 के अनुरूप प्रबंधतंत्र के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के भी निर्देश दिए है। इस मामले में जानकारी करने पर प्रबंध कमेटी के करन थरेजा ने बताया कि उनके स्कूल को अभी मान्यता प्राप्त है। उन्होंने इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एक आरटीआई और आरटीजीएस के संदर्भ में कराई गई जांच का हवाला दिया है।

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