बदायूं। जिले के उपनगर उझानी में चल रहे दसलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप पर्व की पूजा अर्चना करते हुए भगवान महावीर से तप के ताप से तपकर्मों को और अच्छा करने की प्रार्थनाएं की।

सप्तम दिवस उत्तम तप पर्व मानने के लिए भगवान दिगम्बर जैन मंदिर में एकत्र हुए और पुजारियों की विधि विधान रीति और धार्मिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान महावीर की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर आचार्यों ने बताया कि तप केवल उपवास नहीं यह हमें इंद्रियों को वश में करना सिखाता है। आचार्य श्री ने कहा कि तप का मतलब आत्मा को तपन है। तप के माध्यम से आत्मा के साथ बंधे हुए कर्मों को भी तपाना है और अपनी इंद्रियों को वश में करना है। तप का अर्थ साधना के माध्यम से कर्मों का अच्छा करना है।
आज भगवान श्री चन्द्रप्रभु की शांति धारा का सौभाग्य नारायण जैन, चिराग एवं अतिशय जैन को प्राप्त हुआ।इस अवसर पर अनूप जैन, अरुण जैन,निखिल जैन, शशांक, संचित जैन, सोनू जैन, ऋषभ जैन , अर्जितजैन, आकाश,सम्यक एवं समस्त जैन समाज के धर्मानुयायी उपस्थित रहे। महिलाओं में श्रीमती संगीता जैन, प्रतिभा जैन, रूपा जैन, सीमा जैन, प्रतिभा जैन,रुचि जैन, कामिनी जैन, तृप्ति, साक्षी, सान्वी, पूजा ,बीनू आदि समस्त महिला मंडल उपस्थित रहा।






