उझानी

अहंकार और क्रोध को त्याग विन्रम बनना ही सबसे बड़ा तपः आचार्य श्री

Up Namaste

उझानी,(बदायूं)। जैन समाज ने दसलक्षण पर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग पर्व के रूप में मनाया। समाज के लोगों ने आज दिगम्बर जैन मंदिर में विधि विधान से भगवान महावीर स्वामी की पूजा अर्चना की।

बुधवार को भगवान श्री चंद्रप्रभु की शांतिधारा का सौभाग्य निखिल जैन और अंशुल जैन को प्राप्त हुआ। आठवें दिन मंदिर में पूजा अर्चना को जुटे जैन समाज के नर नारियों और बच्चों ने भगवान महावीर की पूजा अर्चना अतिथि पुजारियों द्वारा वैदिक रीति रिवाज से सम्पन्न कराई गई। इस अवसर पर आचार्य श्री कहा कि त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का त्याग ही नहीं है अपितु अपने अहंकार और क्रोध को त्याग कर विनम्रता और दान प्रवृत्ति का धारण करना है। जहां त्याग की भावना होती है, वहां अहंकार जन्म ले ही नहीं सकता।

इस अवसर पर अनूप जैन, अरुण जैन,निखिल जैन, अंकित जैन, प्रदीप जैन, अजय जैन, मनोज जैन, कुलदीप जैन,शशांक, संचित जैन, सोनू जैन,अर्जितजैन, आकाश,सम्यक एवं समस्त जैन समाज के धर्मानुयायी उपस्थित रहे। महिलाओं में श्रीमती संगीता जैन, प्रतिभा जैन, रूपा जैन, प्रतिभा जैन,रुचि जैन, कामिनी जैन, ममता जैन, तृप्ति, साक्षी, सान्वी, पूजा ,बीनू , भावना, अनामिका, आदि जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

Up Namaste

Leave a Reply

error: Content is protected !!